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तुम बेवफ़ा, मैं बेवफ़ा

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    तुम बेवफ़ा, मैं बेवफ़ा मैं पत्थर हूँ  सनम, पानी हो नहीं सकते । तुम किसी और के हो जाना, मैं तुम्हारी कहानी हो नहीं सकते।। परसों के बाद मिली हैं, मेरी मुहब्बत। तुम कुछ भी कर जाओ, पर अपनी मुहब्बत छोड़ नहीं सकते।। कितने अंगारो पे चलकर , उनकी परछाई पाई हैं। छिपकर देखा उनकी आँखों में, तब वो मुझे जताई हैं।।  कैसे जुदा हो जाऊँ अपनी चाहत से, तुम्हारी बातों में आकर। मैं हूँ और रहूँगा ,जो वो अपने दिल में समाई हैं।  किया हैं  मैंने वादा तो उसे निभाएँगे। नजदीक नहीं तो ख्वाबों में मिलने जाएँगे।। रूठना किसी से तो मेरे बस की बात नहीं। अगर एक पल न देखूँ उसे, कैसे मुझे चैन आएँगे।। जो तुम कहो वो बातें मान जाऊँ क्या ? पहले तुमने ही धोखा दिया था, अब तड़पाने आई हो क्या ? ऐसे रुकरुकर गाड़ी चलने दो, मुहब्बत के सफर में।  फिर यहाँ पे मुझे सताने आई हो क्या? लेखक- मनोज कुमार पता: पूरब पुरवा बेलसर ब्लाक जिला गोंडा (यूपी) Email: manojkumar830070@gmail.com  

अक़सर ऐसा ही होता हैं।

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        अक़सर ऐसा ही होता हैं। अक़सर ऐसा ही होता हैं। जब प्रेमी - प्रेमिका से मिलने जाते हैं। सामने नहीं.. खिड़की से कूदकर जाते हैं, कहीं शक न हो जाए लोगों को पकड़ न जाएँ हम मुहब्बत बने बेरहम छूट न जाए मेरा प्यार फिर न कर पाऊँ इजहार अकसर ये बातें सुनने को मिलती हैं। प्रेमिका भी कम चालाक नहीं होती हैं। आने से पहले खिड़कियाँ खोल रखती हैं। बहाने सारे हैं, प्रेमी उससे भी प्यारे हैं। ये बहाने बना लेती हैं। हवा ले रही हूँ, गर्मी लग रही हैं। इसलिए खोल दिया हैं। कितने अच्छे बहाने ढूँढ़ लेती हैं। प्रेमी ऐसे ही चले जाते हैं। रूठे हुए सपनों को प्यार से मनाते हैं। मिलने की ख्वाहिश भी पूरी हो जाती हैं। दूरियाँ भी कम हो जाती हैं। ओर जब मिलकर आते हैं; खिड़कियों के पर्दे गिराकर आते हैं। कोई समझ ही नहीं पाता हैं। फिलहाल सामने का दरवाजा बन्द रहता हैं। अक़सर ऐसा ही होता हैं।। लेखक- मनोज कुमार पता: पूरब पुरवा बेलसर ब्लाक जिला गोंडा (यूपी) Email: manojkumar830070@gmail.com

दिल की गहराइयाँ

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                दिल की गहराइयाँ  कौन जाने वो मस्त मौला, मेरे दिल की गहराइयाँ किस पैमाना से नाप दूँ कितने दर्दो से भरा अश्क हैं कैसे पता करें कैसे किसी को बताऊँ अपना दर्द अपना ही जाने यही अच्छा हैं दूसरों को बताने से बुराइयाँ आती हैं कभी- कभी तो वही पलटकर, खुद सताती हैं। न इजहार करें यही अच्छा हैं। कभी- कभी तो मुहब्बत की फुरैया लोग उड़ाते हैं। दूसरों की प्यार की बातें पूछकर अपना खुद नहीं बताते हैं। दिल की हालत अपना खुद जाने रोकर या हँसकर दर्दो को सँभाले जब प्यार टूटता हैं तो होती हैं दिल की गहराइयाँ       दिल की गहराइयाँ नापी कैसें ? बहुत गहरा कर दिया मेरे दिल को उस बेवफा ने कहाँ से लाऊँ मैं पैमाना वो तो हँसकर चली गई, मजाक- मजाक में पर मेरा मुश्किल हैं यहाँ जीना! कैसे सँभालूँ, ये दलदल दिल को कैसे भरूँ ज़ख्म को कुछ समझ में नहीं आता है। कोई आकर समझाए तो कैसे इस गड्डे को पूर्ण करुँ कुछ तो समझाए कोई मुझे बताएँ कोई मुझे अजनबी समझकर जख्मों से गहरा कर दिया अब इसे भरूँ कैसे किसी को दिखाने का, लायक़ भी नहीं रहा क्या हैं अब मेरे पास कैसे...

प्रेम के बिना जीना मुश्किल

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    प्रेम के बिना जीना मुश्किल (निबंध) संसार में  कोई इन्सान अधूरा नहीं हैं। हर कोई किसी ना किसी से प्रेम करता हैं। चाहे वो प्रकृति से सम्बंधित हो या मानव से अकेला रह ही नहीं सकता हैं। एक उदाहरण के तौर बता रहे हैं- जैसे फूल हैं कि भ्रमर के बिन अधूरा रह नहीं सकता हैं। उसी प्रकार हर मानव प्रेम न करना अधूरा सा लगता हैं। हर इंसान प्रेम करता हैं किसी न किसी से प्रेम ही एक ऐसा शब्द हैं जोकि मानव से लेकर ईश्वर तक को झुका देता हैं। प्रेम के बिन अधूरा ही जीवन हैं। अपने शरीर पर श्रृंगार के आभूषण धारण कर लो अगर प्रेम का आभूषण धारण न करो तो सम्पूर्ण शरीर सूना सा लगता हैं। प्रेम में तो भगवान कृष्ण स्वयं समावेश हो गए थे। हम तो सिर्फ़ तुच्छ मानवरूपी मूर्ति हैं। जोकि प्रथ्वी पर बहुत से अच्छे और बुरे कार्य करते आ रहे हैं। हमें क्यों नहीं धारण करना चाहिए। ईश्वर का दिया हुआ प्रेम एक आभूषण ही समझों वो सबके पास ही रहता हैं। हां जिनके पास प्रेमरूपी आभूषण नहीं हैं तो वो मानव के शरीर में भगवान का वास नहीं के बराबर हैं। क्योंकि जहां प्रेम या फिर कह लीजिए प्यार  वहां ईश्वर हैं।  अगर इन्स...

तबायफ की अनमोल कहानी

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                        तबायफ  कभी सोचा नहीं था। मेरे साथ भी ऐसा होगा, जब गली से निकला  तो ऐसा मुझे एहसास हुआ जैसे कोई मुझे खींच रहा हो। जब मुड़कर मैं दाहिने तरफ देखा तो इतनी सुन्दर सुन्दर लड़कियों के समूह था। कि क्या कहे मेरे साथ में एक दोस्त था। जिसका नाम देवा था।,, देवा ने कहा अरे भाई क्या देख रहे हो.. ये सब तुम्हारे चक्कर में आने वाली नहीं हैं। मैं दाढ़ी खुजाने लगे अरे क्यूं.... फिलहाल सुन्दर लड़की हैं। देवा ने कहा , देखो अगर तुम्हें अच्छी लगती हैं तो जाओ। उन्ही के पास, देखो इनमें कौन सी लड़की अच्छी हैं। मैं डर गए कहने लगे नहीं - नहीं.. रहने दो यार.....! तब! उसने कहा ऐसे तुम सबको देखते रहोगे कुछ नहीं कर पाओगे।,, देख- देखकर मन ही मन उत्सुकता फैलाव जाओ। जो मेरा देवा दोस्त था। वो मायूस हो गया।,, तब मैंने कहा ठीक हैं कोई बात नहीं.. वो जो लाल दुप्पटे वाली  पास वाली के बगल खड़ी हैं। वो मुझे बहुत अच्छी लगती हैं।,, वो जब मुस्काती हैं जैसे- बिजली चमक गई हो ऐसा लगता हैं मुझे। तब! देवा  मुझे बार- बार समझाते हुए कहा...