तबायफ की अनमोल कहानी

तबायफ


                       तबायफ



 कभी सोचा नहीं था। मेरे साथ भी ऐसा होगा, जब गली से निकला  तो ऐसा मुझे एहसास हुआ जैसे कोई मुझे खींच रहा हो। जब मुड़कर मैं दाहिने तरफ देखा तो इतनी सुन्दर सुन्दर लड़कियों के समूह था। कि क्या कहे मेरे साथ में एक दोस्त था। जिसका नाम देवा था।,,


देवा ने कहा अरे भाई क्या देख रहे हो.. ये सब तुम्हारे चक्कर में आने वाली नहीं हैं।

मैं दाढ़ी खुजाने लगे अरे क्यूं.... फिलहाल सुन्दर लड़की हैं।

देवा ने कहा , देखो अगर तुम्हें अच्छी लगती हैं तो जाओ।

उन्ही के पास, देखो इनमें कौन सी लड़की अच्छी हैं।

मैं डर गए कहने लगे नहीं - नहीं.. रहने दो यार.....!

तब! उसने कहा ऐसे तुम सबको देखते रहोगे कुछ नहीं कर पाओगे।,,

देख- देखकर मन ही मन उत्सुकता फैलाव जाओ।

जो मेरा देवा दोस्त था। वो मायूस हो गया।,,



तब मैंने कहा ठीक हैं कोई बात नहीं.. वो जो लाल दुप्पटे वाली  पास वाली के बगल खड़ी हैं। वो मुझे बहुत अच्छी लगती हैं।,,

वो जब मुस्काती हैं जैसे- बिजली चमक गई हो ऐसा लगता हैं मुझे। तब! देवा  मुझे बार- बार समझाते हुए कहा- 

बोला की तुम जाओ उसका नाम पूछो और उनसे पूछो मुझसे दोस्ती करेगी या नहीं...;

बस इतना सा पूछना हैं।,,



लेकिन ध्यान से पूछना यहां वहां देखकर ही, मैंने  उस लाल दुपट्टे  वाली के पास देखा इतनी लड़कियां थी।

क्या बोले... वहां तो गया उस लड़कियों के परन्तु मेरी जुबान उसे देखकर बंध गई।

डर के और शर्माके मारे रूह कापने लगा। मैं कोई बहाना बनाते हुए वहां से लौट आया।,,

तब देवा ने मुझसे पूछा- क्या हुआ नाम पूछकर आए या नहीं...! तुम तो बोल रहे थे कि बहुत खूबसूरत हैं।

हां मानते हैं खूबसूरत हैं परन्तु नाम पूछ कर आओ तब जाने।

वैसे तो दोस्ती बनती नहीं, तब मैंने पुनः उस लड़की के  चक्कर में कोशिश किया।

वहां तक गया और उसका नाम पूछा.. तब वो बोली मेरा नाम जानकर क्या करोगे।

मैंने कहा कुछ नहीं वैसे ही पूछ रहे थे,,

लड़की ने कहा अच्छा ठीक हैं बताती हूं। लड़की ने सोचने लगी । क्या बताऊं या ना बताऊं..;

कुछ सोचकर लड़की ने अपना नाम"दीया" बताया ।

मैने उस नाम सुनकर इतना खुश होकर उस लड़की के तारीफ़ करने लगे। वही लड़की मेरा नाम पूछती हैं। अपना नाम बताओ और अपना फोन नम्बर भी.., तब! सोचने लगे शायद पीटने वाली तो नहीं हैं हम दोनों के,,

ठीक हैं बता ही दिया। बताने के बाद फिर वापस आया देवा के पास ।देवा ने मुझसे पूछा नाम पूछा.. मैने कहा हां दोस्ती भी हो गई।,,




तब देवा ने मुझे बहुत सारी बधाइयां दी। बोला तुम पार्टी दो मित्र, मैंने कहा ठीक हैं चलो घर , मैं और देवा चले आए घर तब! मां ने मुझसे पूछा कहा गए थे घूमने इतनी देर से बुला रही हूं।,,

मैने कहा मां  मेरा दोस्त देवा  उसी के साथ बाज़ार गए थे टहलने .. मां ने कहा अच्छा ठीक हैं जाओ ।

हाथ मुंह धो लो मैं खाना परोस रही हूं।


मैंने कहा ठीक हैं मां, तभी कुछ ही क्षण में देवा का फोन आ गया। देवा ने कहा चलो आज घूमने चलते हैं।

पार्क के तरफ़ , मैंने कहा ठीक हैं दोस्त आज देर हो गई थी।

खाना खा रहे हैं। खा लें तब चलते हैं।,,


मैने खाना खाकर मुंह हाथ धोकर निकल पड़े। तब मां पूछती हैं कहा चल दिए। मैंने कहा आता हूं मां कहीं नहीं जा रहे हैं।

बस गांव के तरफ़ जा रहे हैं। इतनी सी बातें कहकर मुझे जहां देवा बुलाए थे वहां गए।

वहां देवा ने मुझसे मिला और बोला  कहा - कैसे हो मित्र..

मैंने कहा ठीक हैं। देवा ने पुनः कहा "दीया" का हाल बताओ!

मैंने मुस्कुराकर बोला ठीक हैं दोस्त;

देवा फिर से पूछता हैं कि उस लड़की से दोबारा मिले या नहीं.. जाओ उसको कुछ उपहार दो तब वो खुश होगी।


मैंने कहा सच में, देवा और मैं पार्क में बैठे बैठे काफी देर कर दिए। तभी अचानक उस लड़की का फोन आया।

लड़की ने पूछा यानी "दीया" ने कैसे हो आप..

मैंने कहा सब ठीक हैं यार! अपना बताओ..! उसने कहा मैं भी अच्छी हूं।

तब उसने कहा  मैं आपसे मिलना चाहती हूं। मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूं। मैं तुम्हारे बिना अकेली रह नहीं पाती हूं।

अधूरा सा लगता हैं।,,



ये सब बातें बताती गई फोन में , मैंने कहा ठीक हैं।

कहा आती हो मुझसे मिलने, तब उसने कहा एक हमारे गाँव के थोड़ी ही दूर पर फूल का बाग हैं। वहां आकर मिलती हूं।,,

मैंने कहा वहाँ क्यूँ??

मैं तुम्हरे घर ही आता हूं मिलने तब उस लड़की ने कहा नहीं यार ! अभी ठीक से बातें भी नहीं हुई हैं।

मैं अनजान और तुम भी तब कैसे संभव हैं।

मैंने कहा ठीक हैं बाबा!

इतनी सी बातें कहकर फोन कट कर दिए।

तब देवा ने मुझसे बोले आज खूब मस्ती वाली बातें चली।,

मैंने कहा ऐसी कोई बात नहीं हैं मित्र बस वो बोल रही थी मिलने को वही बातें कर रहे थे।,,

ये सब बातें करते हुए देवा अपने घर की तरफ चला गया। और मैं वहाँ जाकर पहुँच गए। दिन के समय वही 12 बज रहे थे।,,



तब वो आई इतनी खूबसूरत थी कि क्या बताएं।

काले- काले बाल, गोरा शरीर के रंग, मैं उसे बार- बार देखने लगा। उसने मुस्कुराकर आख़िर पूछ ही लिया;

क्या देख रहे हो। मैंने कहा कुछ नहीं तुम अच्छी हो यही देख रहा था।

हम दोनों की बहुत देर तक बातें हुई। उसने मेरे बारे में पूछा मैंने सब बताया।

जब मैंने पूछा! तब उसने कहा अच्छा ठीक हैं बाबा बता दूँगी , किसी दिन,,

मैंने उनकी ये बातें सुनकर थोड़ा मन ही मन मायूस हो गए।

आखिर क्यूं मुझे  नहीं बताती ये क्या करती हैं।

शायद कोई...,,


मैंने कहा अच्छा ठीक हैं। कोई बात नहीं किसी दिन बता देना। उसने कहा ठीक हैं। हम अपने घर चले आए। पर मन ही मन में इतना आक्रोश था। उस लड़की के ऊपर क्यूँ मुझे पूरी अपनी लाइफ स्टोरी क्यूँ नहीं बताती इसलिए मुँह लटकाकर पलंग पर बैठ गए।,,

तभी माँ ने पूछा आज झगड़ा तो नहीं कर आए हो। जो इस तरह बैठे हो..

मैंने कहा नहीं मां ऐसे ही। जब सुबह हुआ तो दिन रविवार का था। उस दिन इतना खुश थे कि क्या बताएं रविवार की छुट्टी भी थी।

मैंने फोन उठाकर फोन किया उस लड़की के पास। मैंने कहा आज मेरी कहा मान जाओ यार! चलो आज मेरे साथ घूमने, उसने कहा कहां ले चलोगे;

मैंने कहा चाँद तारों की दुनिया में, तब उसने कहा वाह तब तो चलो। मैंने कहा अरे पागल..,,




बाज़ार चलना हैं चलोगी .. उसने कहा हाँ चलो। उसने तैयार होकर आई अच्छे अच्छे कपड़े पहन कर.. उसने कहा आओ मैं घर के पीछे खड़ी हूँ।,,

मैंने बाइक चालू किया और पहुँच गए। उसे बैठाया और पूरी बाज़ार घुमाया और उसके घर भी गया जबरन फिर भी वो मना करती थी।

तब उसकी माँ ने पूछा बेटा आपका क्या नाम है। मैंने अपना नाम बताया।


उनकी माँ अपनी लड़की से पूछती हैं। ये लड़का कौन था जो अभी आया था।

लड़की ने बोलती हैं माँ वो मेरा दोस्त हैं।

तब माँ ने बोलती हैं अच्छा ठीक हैं, अच्छा लड़का हैं। वर अच्छा हैं तुम्हरे लिए। लड़की चली जाती हैं कमरा में मुस्कुराकर..,, जब घर पहुँचे तब उसने फिर कॉल किया। और खूब मीठी मीठी बातें हुई। उस दिन का माहौल बहुत अच्छा था।

अचानक मेरे मित्र देवा का कॉल आ गया। देवा ने कहा- मित्र दो दिन बाद चलना हैं बाहर यानी शहर पैसे कमाने..,,

मैंने कहा ठीक हैं। माँ से पूछा तो मां ने शहर जाने के लिए मना कर दिया। माँ ने कहा नहीं जाना हैं। मैं तुमसे तंग आ गई हूं।,,,



तुम्हारा रिश्ता लगा रही हूँ। और शादी कर लेना तब जाना दोनों..,, मैंने कहा ठीक हैं देखा जाएगा वो जब और दो दिन बीता तो रिश्तेदार आ गए।


मुझको देखा और कहा मेरी बेटी के लायक़ अच्छा वर हैं।

तब गुमसुम होकर मां से मैने कहा नहीं माँ मैं शादी हरगिज नहीं क रुँगा। मैं एक लड़की को पहले ही चुन लिया हैं।

उसी से शादी करूँगा।



माँ ने कहा ठीक है,,

पुनः माँ  ने उस लड़की का पता पूछा, मैंने माँ से सारी बातें बता दी। मेरे घरवाले उनके घर गए लड़की देखने , लड़की अच्छी , रहन सहन सबकुछ अच्छा था। परिवार भी अच्छे परन्तु जब उनके घर से बाहर निकले तब! गांव की सभी औरतें बताने लगी ये लड़की बदचलन हैं।

काफी गंदे लोग परिवार हैं  वो काफी रिश्ते लौट गए हैं उनके घर से सिर्फ़ यही वजह हैं कि लड़की घर से बाहर जाती हैं। और रात को आती हैं वैश्या हैं ये।

जितने भी बातें उनके सुने मेरे माथे पर पसीने आ गए।

ये सोचने लगे ना आते इस गांव ना ऐसी गन्दी बातें सुनते।

अपने घर वापस चले आए। और उस लड़की के मोबाइल नंबर भी ब्लॉक कर दिया।

मुझे काफी डाट पड़ी तुम किससे दोस्ती किए थे। एक बेवफा से,,,

मैंने सबकी बातें सुनकर मेरी आँखों में  आँसू आ गए।

और आँख को हमेशा के लिए मूँद लिए उनको न देखने के लिए।,,,,।।।।




लेखक- मनोज कुमार

पता: पूरब पुरवा बेलसर ब्लाक जिला गोंडा (यूपी)

E-mail: manojkumar830070@gmail.com




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