संदेश

मई, 2022 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

नरम होंठो की लकीरें

चित्र
                      नरम होंठो की लकीरें नरम होंठो की लकीरें बयां कर देती है कितने आशिक़ फिदा हुए तुम पे तू पहले कैसी थी और आज कैसी है ये सब बातें लिख जाती है और वो बताती भी है जमीं बंजर है या बीज बो दिए गए हैं किसी आशिक़ ने बो दिया हैं अपना प्यार हरा भरा करने के लिए न चाहते हुए भी दिखाई पड़ता है नग्न आँखों से लकीरों में.. साफ साफ लिखा होता है कितनी बार नजरों से वार चला है कौन मुलजिम है कौन वकील है सब जानकारी हो जाती है मत कोई बताएं किसी को उसमें लिखा ही होता हैं नरम होंठो की लकीरों पे!!!! लेखक: मनोज कुमार पता: पूरब पुरवा बेलसर ब्लाक जिला गोंडा (यूपी) E-mail: manojkumar830070@gmail.com

आओ चलें मितवा

चित्र
                          आओ चलें मितवा आओ चलें मितवा बहुत दूर.. वहीं हम और तुम रहें यहाँ मुझे अच्छा नहीं लगता तेरे साथ इक पल बिताने का वहीं चलते है जहाँ .. हीर रांझा गए थे बहुत दूर जगह पर साथ साथ वही पर हम और तुम जायेंगे यहां पर पंछी समझकर कुछ लोग दोनों को उड़ा रहे है कभी तराजू नहीं उठाए है प्यार नही तौले है कितना वजन होता है कितना कीमत होता है आओ मितवा हम दोनों चले परछाइयां छोड़कर यहां से मेरी दीवानगी सभी लोग देखें कितने मजनू थे  एक दूसरे पर! कितने मरते थे एक अपनी पहचान छोड़कर चलो नाम छोड़कर चलो सबका दुलार छोड़कर चलो हम तुम्हारे साथ रह लेंगे तुम मेरे साथ रहना जीवन बिताएंगे हम दोनों! प्रेम के अशियाना बनाकर किसी से कुछ नहीं कहेंगे बस तुम हाँ करो राजी हो चलने मेरे साथ तुम मेरे प्रिय हो न आओ चलें! देर किस बात की हम है न इस दुनिया कों बोलने दो ये दुनिया खुद जुदा ही है अपने अपने प्रेमी से तुम्हें क्या जीने का रास्ता बताएगी वो ख़ुद भटकी है एक दूसरे से की यादों में तुम इसके बातों में मत आना ये भिगो भिगो कर मारती है इसके पीछ...