खून से लिखी चिठ्ठी
खून से लिखी चिठ्ठी स्वेता की उम्र भी हो गई है। शादी करने का उनके पिता जी काफी चिंतित में रहते हैं। तभी स्वेता की मां पूछती हैं, "हे जी आप क्या सोच रहे हो। चार पाई पर बैठ कर स्वेता के पिता बोलते हैं।, " नहीं जी कुछ नहीं बस यही सोच रहे थे कि बेटी की उम्र भी हो गई है । शादी करने का अब क्या होगा, पैसा कहां से इक्कठा करे। स्वेता के पिता काफी देर तक सोचते हैं और बोल पड़ते हैं। जो किए हम दोनों के बीच में बाते उस बात को वहीं पर रहने दो।" बेटी को कुछ मत बताना कि पिता जी के पास पैसा नहीं है। और उम्र भी हो गई शादी करने की स्वेता की मां बोलती है ठीक है जी मैं कभी भी नहीं बोलूंगी। "इतनी सी बातें करने के बाद स्वेता कि मां रसोई घर में चली जाती है, और स्वेता के पिता जी खेत के तरफ चले जाते हैं।" तभी स्वेता कॉलेज से लौटकर घर आती हैं। और बोलती है, " मां नमस्ते ! क्या बना रही हो मां तब! उनकी मां बोलती है, आओ बेटी आज खीर बनाई है। स्वेता कहती हैं अच्छा मां तब तो मैं चाव से खाऊंगी भर पेट मां के हाथ से बना खीर। तभी स्वेता की मां कहती हैं, "ठीक है बेटी आज जितना मर्जी उतना त...