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तबायफ की अनमोल कहानी

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                        तबायफ  कभी सोचा नहीं था। मेरे साथ भी ऐसा होगा, जब गली से निकला  तो ऐसा मुझे एहसास हुआ जैसे कोई मुझे खींच रहा हो। जब मुड़कर मैं दाहिने तरफ देखा तो इतनी सुन्दर सुन्दर लड़कियों के समूह था। कि क्या कहे मेरे साथ में एक दोस्त था। जिसका नाम देवा था।,, देवा ने कहा अरे भाई क्या देख रहे हो.. ये सब तुम्हारे चक्कर में आने वाली नहीं हैं। मैं दाढ़ी खुजाने लगे अरे क्यूं.... फिलहाल सुन्दर लड़की हैं। देवा ने कहा , देखो अगर तुम्हें अच्छी लगती हैं तो जाओ। उन्ही के पास, देखो इनमें कौन सी लड़की अच्छी हैं। मैं डर गए कहने लगे नहीं - नहीं.. रहने दो यार.....! तब! उसने कहा ऐसे तुम सबको देखते रहोगे कुछ नहीं कर पाओगे।,, देख- देखकर मन ही मन उत्सुकता फैलाव जाओ। जो मेरा देवा दोस्त था। वो मायूस हो गया।,, तब मैंने कहा ठीक हैं कोई बात नहीं.. वो जो लाल दुप्पटे वाली  पास वाली के बगल खड़ी हैं। वो मुझे बहुत अच्छी लगती हैं।,, वो जब मुस्काती हैं जैसे- बिजली चमक गई हो ऐसा लगता हैं मुझे। तब! देवा  मुझे बार- बार समझाते हुए कहा...