संदेश

क्यों शक किया मुझपर लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

क्यों शक किया मुझपर

चित्र
  क्यों शक किया मुझपर दुप्पटे को फाड़कर रुमाल बनाया नहीं जाता। किसी पे गलत इल्ज़ाम लगाकर ठुकराया नहीं जाता।। देखकर ही बेवफ़ा कहा जाता हैं अपनों को, वरना झूठी शिकायतें, अपने इश्क में दर्ज किया नहीं जाता।। आँखों से ही कई गलतियाँ होती हैं। जुदा हो जाता हैं अपना प्यार ओर रोती हैं।। कैसे कहें किसकी गलती हैं अल्फाजों में, झूठी बातें सुनकर बस आँखे भर आती हैं।। ये कैसा इश्क हैं मुझपर । जो चुप हैं आँखो में आँसू डालकर।। नहीं करना था मुझसे प्यार तो पहले बता देती। इस तरह मुझे गलत इल्ज़ाम लगाकर कभी न ठुकराती।। कब तक तेरे वफाओं के पर्दा के पीछे रहूँ। किसी से बातें न करूँ, और उसके सामने न रहूँ।। कब तक तुम झाँककर देखोगी यूँ ही, अपने आशियानों से। मैं तो प्रेम दीवाने हैं मेरे प्रेम के कातिल, किसी के दिल में क्यूँ न रहूँ।। कुछ सोचकर ही तुझे बोलना था। मुझसे पूछताछ करके ही, बेवफ़ा कहना था।। इरादें के शख्त थे हम सब सुन लेते, यूँ ही बैठकर। जब पहले से ही  तुझसे प्यार था, तब मुझे शक करना ही नहीं था।। अब पछताने से तुझे क्या होगा। ज़ख्म देकर यूँ ही , दवा लगाने से क्या होगा।। जितना दर्द होता हैं कहने से,...