दिल देने की रुसवाई
दिल देने की रुसवाई विद्यालय खुलने ही वाला था, तभी अचानक मेरे दोस्त राजू वहां गेट के सामने पहुंच गए। हम वहां अशोक के पेड़ के नीचे खड़े थे।राजू के इंतजार में, राजू आकर हाथ मिलाए ओर बोले,, यहां क्यों खड़े हो अभी गेट क्यों नहीं खुला । सभी लड़के गुमसुम थे।,, "तभी सफेद कार से सफेद कुर्ता में प्रिंसिपल उपस्थित हुए। ओर पूछने लगे गेट अभी तक क्यो नहीं खुला। जितने लड़के थे वहां पर सब ने एक साथ जवाब दिए। साहब अभी चपरासी नहीं आए हैं। उन्हीं के हाथ में है चाभी , प्रिंसिपल फोन किए। चपरासी दौड़ कर आए गेट खोला गया सभी लड़के और लड़कियां प्रवेश हुए। एकाएक करके प्रार्थना में खड़े हो गए। एक तरफ थी लड़के की लाइन एक तरफ थी लड़कियों की लाइन प्रिंसिपल साहब मंच पर गए प्रार्थना होने लगा। हम और हमारे दोस्त राजू प्रार्थना करने लगे। कुछ ही समय बाद प्रार्थना समाप्त हो गया सभी लोग अपने कमरा में भागे, वहीं और राजू धीमी- धीमी चलने लगा कमरा के ओर। तभी अचानक संयोगवश एक लड़की राजू के शरीर से टकरा गई। लड़की ने गुस्सा से बोला,, दिखाई नहीं पड़ता मूर्ख, राजू माफ़ी मांग कर अपने कमरा में आकर बैठ गया। तब! मास्टर साहब बोलो...