तुम बेवफ़ा, मैं बेवफ़ा


 


 तुम बेवफ़ा, मैं बेवफ़ा





मैं पत्थर हूँ  सनम, पानी हो नहीं सकते ।


तुम किसी और के हो जाना, मैं तुम्हारी कहानी हो नहीं सकते।।


परसों के बाद मिली हैं, मेरी मुहब्बत।


तुम कुछ भी कर जाओ, पर अपनी मुहब्बत छोड़ नहीं सकते।।




कितने अंगारो पे चलकर , उनकी परछाई पाई हैं।


छिपकर देखा उनकी आँखों में, तब वो मुझे जताई हैं।।


 कैसे जुदा हो जाऊँ अपनी चाहत से, तुम्हारी बातों में आकर।


मैं हूँ और रहूँगा ,जो वो अपने दिल में समाई हैं। 




किया हैं  मैंने वादा तो उसे निभाएँगे।


नजदीक नहीं तो ख्वाबों में मिलने जाएँगे।।


रूठना किसी से तो मेरे बस की बात नहीं।


अगर एक पल न देखूँ उसे, कैसे मुझे चैन आएँगे।।




जो तुम कहो वो बातें मान जाऊँ क्या ?


पहले तुमने ही धोखा दिया था, अब तड़पाने आई हो क्या ?


ऐसे रुकरुकर गाड़ी चलने दो, मुहब्बत के सफर में।


 फिर यहाँ पे मुझे सताने आई हो क्या?



लेखक- मनोज कुमार

पता: पूरब पुरवा बेलसर ब्लाक जिला गोंडा (यूपी)

Email: manojkumar830070@gmail.com







 

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