मैं साइर हूँ ।
मैं साइर हूँ।
लिख देता हूँ,
किसी के हुस्न पर
पायल की झंकार तक
होंठ के पटल,
मुस्कान के अंदाज़ पर
किसी के चलन,
दिल की आहट!
निखरते रूप
सुनहरी धूप!
वो हँसता हुआ चेहरा
मुझे ख़्वाबों में जो घेरा
कमर में बँधा जो ऑंचल
किसी के गहरे होंठ के तल
आँखों में लगा जो काज़ल
चलन धीरे- धीरे,
जिसका मन हैं चंचल
जुल्फों के हवाओं में
रंगीन फिजाओं में
किसी के चेहरा के नूर पर
जो मुझसे मायूस हैं,
उनके मगरुर पर!
किसी के प्रेम कहानी
वो दीवानी!
जिसकी आँखें,
नीली- नीली!
मधु भरी
और थोड़ा शर्मीली!
जो किया मुझे कातिल!
जिसकी चाहत,
मुझे खींच लिया
जिसके होंठो ने दिया मुझे गालियाँ
लिख देता हूँ
छोड़ता नहीं!
मैं हूँ साइर!!
लेखक- मनोज कुमार
पता: पूरब पुरवा बेलसर ब्लाक जिला गोंडा (यूपी)
Email: manojkumar830070@gmail.com


टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें