अब शौक नहीं
अब शौक नहीं
बहुत मजे किए तेरे प्रेम में,
करुणा का छाया पाया।
हर दिन बिछड़ा दूर तलक,
नहीं मैं तेरा प्यार पाया।।
अभिलाषा नहीं अब जीने की,
तेरे संग तुम्हारे होकर।
अब सहन नहीं हैं, जलन हैं,
जो दिल पर चोट लगी हैं मुस्काकर।
तूने दर्द दिया हैं, दवा नहीं।
मेरे टूटे दिल के टुकड़े पूर्ण किये नहीं।
विश्वास था तुझपर मेरी होगी।
पर क्या हुआ दूसरों के हो गई भोगी।।
क्यों छोड़ दिया राहों में, फिर बदनाम किया।
लोगों के नज़र मे गिर गए हम।
जब नहीं था साथ देने का इश्क़ में,
क्यों खुशी दिया और ज्यादा ग़म।।
मैंने इश्क़ किया था तुझसे, सजा भी पाया।
ना तू मेरे हुए और न मैं दूसरों के हो पाया।।
बस थोड़ी सी साँसें बाकी हैं, मुझे जीने की।
फिर तुझसे कैसे कहूँ, तेरे साथ रहने की।।
लेखक - मनोज कुमार
पता: पूरब पुरवा बेलसर ब्लाक जिला गोंडा (यूपी)
Email: manojkumar830070@gmail.com


टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें