किसको सुनाऊँ मैं अपनी जुबानी


 


 किसको सुनाऊँ मैं अपनी जुबानी




किसको सुनाऊँ..

मैं अपनी जुबानी

बहता हुआ हैं,

इक नदी का पानी।


उसके तट भी भीगे,

अँगारे बनकर..

ह्रदय तड़प रहा हैं,

शोक में होकर

अब क्या वो बोले,

जिसकी हैं ये कहानी

किसको सुनाऊँ.......


लहरों का झोंका

आई हैं उठकर..

भीगा हैं बदन जो,

इक दर्द में तपकर।

कैसे सँभालू ..

ये बहते आँखों के पानी

किसको सुनाऊँ........


उनकी पथरीली आँखें,

दर्द कैसे छुपाए,

पनघट की घाटी,

कोई तोड़ ले जाए।

कोई कैसे बताये

मेरी जुबानी..

किसको सुनाऊँ.......



लेखक- मनोज कुमार

पता: पूरब पुरवा बेलसर ब्लाक जिला गोंडा (यूपी)

Email: manojkumar830070@gmail.com









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