नरम होंठो की लकीरें
नरम होंठो की लकीरें नरम होंठो की लकीरें बयां कर देती है कितने आशिक़ फिदा हुए तुम पे तू पहले कैसी थी और आज कैसी है ये सब बातें लिख जाती है और वो बताती भी है जमीं बंजर है या बीज बो दिए गए हैं किसी आशिक़ ने बो दिया हैं अपना प्यार हरा भरा करने के लिए न चाहते हुए भी दिखाई पड़ता है नग्न आँखों से लकीरों में.. साफ साफ लिखा होता है कितनी बार नजरों से वार चला है कौन मुलजिम है कौन वकील है सब जानकारी हो जाती है मत कोई बताएं किसी को उसमें लिखा ही होता हैं नरम होंठो की लकीरों पे!!!! लेखक: मनोज कुमार पता: पूरब पुरवा बेलसर ब्लाक जिला गोंडा (यूपी) E-mail: manojkumar830070@gmail.com